Wednesday, 3 July 2019

History

History of Bedama Mistri  Bhawan
इतिहास  बेदामा मिस्त्री भवन का
 बेदामा मिस्त्री  भवन का इतिहास बहुत पुराना है। इसका  निर्माण 5 दशक पूर्व  बेदामा मिस्त्री   द्वारा किया गया था इस भवन में आठ  कमरे व  दो मुख दरवाजा है  कमरे के ठीक सामने एक बड़ा सा आंगन का निर्माण किया गया है ।बेदामा मिस्त्री भवन के चारो ओर भवन को आकर्षित करने के लिए बगीचा भी लगाई गई जिन में से आम  ,तार व ,शिसम मुख्य है। भवन का रंग सफ़ेद व चमकिल है
बेदामा मिस्त्री भवन की स्थिति
 बेदामा मिस्त्री  भवन का निर्माण जनकपुर गांव की आखिर छोड़ पूर्व दिश में  किया गया है जो जनकपुर गांव व बाली के मुख्य मार्ग के किनार पर इस्थिर है। जो जनकपुर गांव की सुंदरता का भाव रूप का  वर्णन करता है इसके आस पड़ोस में किसी प्रकार कि कोई  घर नहीं बना है।
 बेदामा मिस्त्री का परिचय
बेदामा मिस्त्री  एक अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोहार  समुदाय  का व्यक्ति है। जो बहुत मेहनती   और लगनशील प्रकार की व्यक्ति है। इनकी विशेता आस पड़ोस की गांव में देखने को मिलता है इनका मुख् तः दो  बेटा व दो बेटियों भी है एक का नाम विजय मिस्त्री व दूसरा का प्रमोद मिस्त्री  है। इनका पांच पोता  तथा पांच पोतिया भी है।
बेदामा मिस्त्री के पिता का नाम फगू मिस्त्री  व माता के नाम गंगिया देवी थी।
बेदामा मिस्त्री कुल मिलाकर चार भाई है सुदाम मिस्त्री ,बेदमा मिस्त्री  मधुसुदन मिस्त्री व बहादुर मिस्त्री  ।
जिन में से बेदामा मिस्त्री मानझिल में से है।
बेदामा मिस्त्री का रंग गोरा बदन  ,लंबी मुछः  व हुची नाक है । इनका पहनावा हमेशा सफ़ेद रंग धोती  शोसाली कट कुर्ता और एक गमछा  मुख है।

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